दिव्या देशमुख, भारतीय शतरंज की उभरती हुई सितारा, ने हाल ही में नीदरलैंड्स में आयोजित प्रतिष्ठित Tata Steel Chess Tournament में भाग लिया। इस टूर्नामेंट के दौरान, उन्होंने अपनी शतरंज की रणनीतियों और कौशल से सभी को प्रभावित किया। हालांकि, उनके खेल की बजाय, दर्शकों और मीडिया का ध्यान उनकी उपस्थिति, कपड़ों, बालों और उच्चारण पर केंद्रित रहा। यह स्थिति दिव्या के लिए निराशाजनक थी, और उन्होंने इस विषय पर खुलकर अपनी राय व्यक्त की।
🎙️ आत्म‑साक्षात्कार: ईमानदारी और स्पष्टता
दिव्या देशमुख ने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा:
- “अक्सर दर्शकों को मेरे खेल से ज़्यादा मुझपर उपलब्ध irrelevant चीज़ों जैसे कपड़े, बाल, उच्चारण पर ध्यान देने की आदत है।”
- “यह सच है कि लोग महिला शतरंज खिलाड़ियों की असली प्रतिभा को अनदेखा कर देते हैं। केवल दिखने वाले पहलू को महत्व देते हैं।”
इन शब्दों ने समाज को आईना दिखाया—जहां प्रतिभा को नजरअंदाज कर दिया जाता है और असंबंधित पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है।
🛡️ आयोजकों की प्रतिक्रिया: एक सकारात्मक संकेत
Tata Steel Chess Tournament के आयोजकों ने दिव्या के अनुभव को गंभीरता से लिया और महिला खिलाड़ियों के लिए समान और सुरक्षित प्रतिस्पर्धा का वातावरण सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई। इस कदम को दिव्या ने सकारात्मक संकेत माना, जिसने महिला खिलाड़ियों की सुरक्षा की दिशा में उम्मीद जगाई।
👤 परिवार, पृष्ठभूमि और शुरुआती सफर
- जन्म: 9 दिसंबर 2005, नागपुर में एक मराठी चिकित्सक परिवार में।
- पिता: डॉ. जितेंद्र देशमुख, माता: डॉ. नम्रता देशमुख, दोनों चिकित्सक हैं; बड़ी बहन आर्या विध्याध्ययनरत है।
शुरुआत में शतरंज सिर्फ रुचि के लिए शुरू हुआ, लेकिन जल्दी ही मंच‑स्तर की तैयारी और कोचिंग से यह उनकी पहचान बन गया।
🏆 प्रमुख खेल उपलब्धियाँ
- 2021: Woman Grandmaster (WGM) बनने वाली 21वीं भारतीय महिला खिलाड़ियों में से एक।
- 2022: भारतीय महिला चैम्पियन, Chess Olympiad में टीम और व्यक्तिगत पदक।
- 2023: Asian Women’s Chess Champion; Women’s Rapid Champion (Tata Steel India)।
- 2024: World U‑20 Girls Champion (10/11 स्कोर), Chess Olympiad में टीम और व्यक्तिगत गोल्ड मेडल।
उनकी Elo रेटिंग अक्टूबर 2024 में 2501 पहुंच चुकी थी, जो उन्हें भारत की शीर्ष महिला खिलाड़ियों में से एक बनाती है।
🌍 जून 2025 में एक ऐतिहासिक जीत — Hou Yifan को हराया
World Rapid & Blitz Team Chess Championship, London (2025) में Divya ने विश्व नंबर-1 और पूर्व महिला विश्व चैंपियन Hou Yifan को 74 चालों के एक ब्लिट्ज मुकाबले में मात दी। इसके साथ ही उन्होंने टीम सिल्वर और व्यक्तिगत ब्लिट्ज ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित भारत के कई नेताओं ने उन्हें बधाई दी।
🧩 FIDE Women’s World Cup 2025: विश्व कप में धमाकेदार सफर
बातुमी, जॉर्जिया में आयोजित इस टूर्नामेंट में Divya की शानदार यात्रा रही:
- राउंड 2: Georgian WFM Kesaria Mgeladze को Richter‑Rauzer Sicilian जैसी ओपनिंग से 45 चाल में मात, 2463 Elo रेटिंग के साथ शानदार जीत।
- क्वार्टरफाइनल: GM Harika Dronavalli पर Rapid tie-break में 3–1 से जीत; यह एक ऑल‑इंडियन मुकाबला था।
- सेमीफाइनल: World No. 8 Tan Zhongyi से क्लासिकल मुकाबले में 101 चालों बाद 1.5–0.5 से रोमांचक जीत — इस जीत के साथ Divya बनीं पहली भारतीय महिला जो World Cup फाइनल तक पहुँची और साथ ही 2026 Women’s Candidates Tournament में क्वालीफाई की।
🎯 खेल‑जीवन संघर्ष और स्पष्ट आशय
खेल के हर स्तर में यदि स्वाद खामोश हो जाता है, तो वह खेल से बढ़ कर नहीं रह जाता। दिव्या देशमुख ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि:
- वह केवल ध्यान खींचने वाली शारीरिक दृष्टि से नहीं जानी जानी चाहतीं, बल्कि उनके जज़्बे, रणनीति, और जीत की सराहना हो।
- उन्होंने कहा: “बहुत कम लोग मेरे मैचों पर ध्यान देते हैं। यह बहुत दुखद है,” और बताया कि कैसे कई बार खेल के बजाय केवल appearance पर टिप्पणी होती है।
✊ दिशा‑निर्देश और पहल आगे की राह
- स्टार खिलाड़ियों जैसे Divya ने आवाज़ उठाकर इस मुद्दे को गंभीरता से सामाजिक विमर्श में लाया है।
- टूर्नामेंट आयोजकों ने स्पष्ट किया कि वे महिला खिलाड़ियों से संबंधित अनावश्यक टिप्पणी को रोकने के लिए कड़ा दृष्टिकोण रखते हैं।
- यह केवल शतरंज तक सीमित नहीं है — यह सभी खेलों और सार्वजनिक मंचों पर महिलाओं का सम्मान
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